प्राचार्य प्रो. अशोक कुमार झा बोले —संविधान भारतीय लोकतंत्र की आत्मा; कार्यक्रम में परिचर्चा, प्रस्तावना वाचन और राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन
कोसी नाऊ,मुरलीगंज।
कमलेश्वरी प्रसाद महाविद्यालय, मुरलीगंज में बुधवार को संविधान दिवस विधिवत् गरिमा, उत्साह और गंभीर संवैधानिक भाव के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संविधान की प्रस्तावना वाचन से हुई, जिसमें महाविद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ सम्मिलित हुए। प्रस्तावना के सामूहिक पाठ के दौरान पूरा परिसर संवैधानिक आदर्शों और राष्ट्रभाव से गूंज उठा।
“संविधान—हर भारतीय का मार्गदर्शक” : प्राचार्य प्रो. अशोक कुमार झा*
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अशोक कुमार झा ने भारतीय संविधान की उत्कृष्टता, लोकतांत्रिक भावना, नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा—
“भारतीय संविधान न केवल हमें दिशा देता है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन और न्याय सुनिश्चित करता है। विद्यार्थियों को इसके मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।”
उन्होंने यह भी बताया कि 11 अक्टूबर 2014 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान दिवस मनाने का निर्णय लिया था।
प्राचार्य ने गर्व व्यक्त करते हुए बताया कि महाविद्यालय के संस्थापक कमलेश्वरी प्रसाद यादव स्वयं संविधान सभा के सदस्य थे, लेकिन इतिहास के पन्नों में उनकी महान शिक्षा-सेवा और योगदान को वह पहचान नहीं मिली जिसके वे अधिकारी थे।
व्याख्यान श्रृंखला—संविधान की यात्रा का विस्तृत विश्लेषण
कार्यक्रम का संचालन एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर आज़ाद ने किया।
उन्होंने अपने वक्तव्य में संविधान को राष्ट्र की आधारशिला बताते हुए 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट से लेकर संविधान निर्माण अधिनियम तक की ऐतिहासिक यात्रा का विस्तार से विवरण दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत किस प्रकार डोमिनियन स्टेट के रूप में कार्य करता था और संविधान ने भारत को एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया।
इसके बाद वक्ताओं की श्रृंखला शुरू हुई, जिसमें डॉ. निमिषा राज, डॉ. संगीता सिन्हा, डॉ. अवधेश ब्याहुत, डॉ. विकास कुमार सिंह, डॉ. सुशांत सिंह
ने संविधान दिवस के अवसर पर अपने विचार रखे।
छात्र-छात्राओं ने भी रखे विचार
संविधान दिवस पर छात्रों द्वारा भी विचार प्रस्तुत किए गए।
मुख्य रूप से—
रिमझिम कुमारी, अंकित राज, शिवानी कुमारी, पुतुल कुमारी, निक्की कुमारी, अमन कुमार
ने संविधान की मूल भावना, अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर अपने विचार साझा किए।
उत्साहपूर्ण उपस्थिति—निष्ठा और एकता का संदेश
इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।
वक्ताओं ने संविधान के प्रति निष्ठा, सामाजिक सद्भाव, न्याय, समानता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की अपील की।
राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
महाविद्यालय परिवार ने इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी प्रतिभागियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और उपस्थित जनों के प्रति आभार प्रकट किया।


