भूदान की पवित्र जमीन पर अवैध कब्जा, आलीशान मकान और फार्म हाउस — पूछता है अररिया, यही है सुशासन?
सांसद प्रदीप कुमार सिंह बोले — गरीबों की जमीन पर कब्जा अस्वीकार्य, जांच होगी और कार्रवाई तय
डॉ रुद्र किंकर वर्मा,अररिया।
भूदान आंदोलन की आत्मा को शर्मसार कर देने वाली घटना ने सीमांचल की सियासत को झकझोर दिया है। रानीगंज के भाजपा के पूर्व विधायक परमानंद ऋषिदेव, जिनके पास पहले से ही कई बीघा जमीन, सरकारी पेंशन और सम्पन्न परिवार है, पर अब भूदान की भूमि पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप लगा है।
अररिया जिला मुख्यालय के जयप्रकाश नगर, शिवपुरी स्थित अररिया कॉलेज के बगल में गरीबों और भूमिहीनों के नाम दान में मिली भूमि को हथिया कर उन्होंने पक्का मकान, बाड़ी, फार्म हाउस और लॉज बना लिया है।
जिस जमीन को समाजसेवकों ने गरीबों की आजीविका के लिए समर्पित किया था, आज वह राजनीति और रईसी के प्रतीक के रूप में खड़ी है।
*कई बीघा निजी जमीन, बेटा-बेटी अधिकारी — फिर भी गरीबों की भूमि पर कब्जा*
परमानंद ऋषिदेव का पैतृक गांव फारबिसगंज प्रखंड में है। वहां उनकी कई बीघा निजी जमीन है।
वे पूर्व विधायक हैं, सरकार से पेंशन प्राप्त करते हैं, जबकि उनके पुत्र-पुत्री अधिकारी पदों पर कार्यरत हैं।
इसके बावजूद उन्होंने गरीबों की हक वाली भूदान भूमि हथिया ली, जो समाज के प्रति न केवल अन्याय बल्कि विनोबा भावे की विरासत पर भी कलंक है।
*दल बदलकर चुनाव लड़ा, जनता ने नकारा — अब भाजपा का चोला ओढ़े घूम रहे*
2020 के विधानसभा चुनाव में जब भाजपा ने उन्हें रानीगंज से टिकट नहीं दिया, तो उन्होंने दल बदलकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर गए, लेकिन जनता ने उन्हें स्पष्ट संदेश दिया — पराजय।
अब फिर भाजपा का चोला ओढ़कर वे खुद को ‘सेवक’ बताने का ढोंग कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि उन्होंने गरीबों का अधिकार निगल लिया है।
*सांसद प्रदीप कुमार सिंह बोले — “भूदान की जमीन पर किसी का भी कब्जा बर्दाश्त नहीं”
इस गंभीर आरोप पर सीमांचल के भाजपा सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने कहा — “पूर्व विधायक परमानंद ऋषिदेव द्वारा भूदान भूमि पर मकान निर्माण और कब्जा की शिकायत मिली है। यह सरासर अवैध है। जांच कराई जाएगी और कब्जे वाली भूमि भूधारकों या भूदान समिति को वापस दिलाई जाएगी।”
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “गरीबों का हक छीनने वाले चाहे किसी भी दल से हों, बख्शे नहीं जाएंगे।”
*प्रशासन बना धृतराष्ट्र, गरीब घूम रहे भूदान कार्यालय के चक्कर*
भूदान भूमि के असली हकदार वर्षों से दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं।
अररिया कॉलेज के बगल में भूदान की कई एकड़ जमीन पर कई पक्के और कच्चे भवन खड़े हो गए हैं, कुछ स्थानों पर चारदीवारी डालकर कब्जा भी पक्का कर लिया गया है।
प्रशासन की खामोशी इस सुशासन सरकार की संवेदनहीनता को उजागर करती है।
जरा हट के नजरिया : पूछता है अररिया!
विनोबा भावे ने जब “भूदान” का बीज बोया था, तो उसमें समानता और त्याग की खुशबू थी।आज वही बीज सत्ता और संपन्नता की दीवारों में कैद है।
भाजपा के पूर्व विधायक परमानंद ऋषिदेव जब गरीबों की जमीन पर राज करते हैं, तो यह सिर्फ कानून नहीं, विनोबा भावे की कल्पना की हत्या है।
भूमिहीन को एक धुर जमीन नसीब नहीं, विधायक जी बीघा का बीघा कर लिया है कब्जा।



