बिहार राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय “बाल अधिकार संरक्षण सप्ताह” का भव्य समापन
कोसी नाऊ ब्यूरो,पटना।
बिहार राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय बाल अधिकार संरक्षण सप्ताह का आज भव्य समापन हुआ। आयोग कार्यालय के प्रांगण में आयोजित समापन समारोह सह पुरस्कार वितरण कार्यक्रम की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने की। आयोग के सदस्यगण डॉ. हुलेश मांझी, श्रीमती संगीता ठाकुर, श्रीमती ज्यो।ति कुमारी, श्रीमती शीला पंडित, डॉ. सुग्रीव दास, श्री राकेश कुमार सिंह के साथ ही पुलिस महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) श्रीमती अनुसुइया रणसिंह की विशिष्ट उपस्थिति रही। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, अभिभावक एवं आयोग के पदाधिकारी व कर्मी भी मौके पर मौजूद रहे।
इस अवसर पर अपने संबोधन में अध्य क्ष डॉ. अमरदीप ने कहा कि अभी भी वैसे बच्चों की संख्या बहुत बड़ी है जो अपने अधिकारों को नहीं जानते और अगर जानते भी हैं तो उन्हें नहीं पता कि उन्हें अपनी बातों को रखना कहाँ है। आयोग वैसे सभी बच्चों की आवाज है। उन्होंने कहा कि आज इस बात की सबसे अधिक जरूरत है कि बच्चे अपने भीतर झांककर देखें, अपनी क्षमता को पहचानें और एक-दूसरे की ताकत बनकर चुनौतियों का सामना करें। इसके साथ ही डॉ. अमरदीप ने बाल अधिकार संरक्षण सप्ताह के सफल आयोजन में सहयोग के लिए समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग सहित सभी जिलों के जिला पदाधिकारियों, जिला शिक्षा पदाधिकारियों, डीपीआरओ, डीपीओ (आईसीडीस), एडीसीपी, सीपीओ सहित आयोग के सभी सदस्यों एवं पदाधिकारियों को धन्यवाद दिया।
समारोह के दौरान आयोग के सदस्यव डॉ. हुलेश मांझी ने कहा कि हर बच्चे को एक समान आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। आयोग उन तमाम बच्चों को हरसंभव सहायता देगा जो गरीबी और अभाव के कारण विकास की दौड़ में पिछड़ जाते हैं। श्रीमती संगीता ठाकुर का कहना था कि आज के बदलते समय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरत इस बात की है कि माता-पिता आगे बढ़कर अपने बच्चों को अपना दोस्त बनाएं और उनकी भावनाओं को समझें। वहीं, डॉ. ज्योति कुमारी ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को किसी के बहकावे में आए बिना हमेशा अपने माता-पिता के दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए क्योंकि वही उनके पहले गुरु और सबसे बड़े शुभचिंतक होते हैं।
अपने संबोधन के क्रम में आयोग की सदस्य श्रीमती शीला पंडित ने कहा कि बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरुक रहना चाहिए। उन्हें सतर्क होकर देखना चाहिए कि उनके आसपास क्या हो रहा है और जरूरत पड़ने पर दूसरे बच्चों की मदद करनी चाहिए। वहीं, डॉ. सुग्रीव दास ने बच्चों में मोबाइल की बढ़ती लत पर चिन्ता जाहिर की और कहा कि आधुनिक समय में बच्चों से जुड़ी कई समस्याओं की जड़ में मोबाइल है। ऑनलाइन गेम की गिरफ्त में आकर बच्चे राह भटक रहे हैं। वहीं, श्री राकेश कुमार सिंह ने अपना संबोधन बाल तस्करी और सूखा नशा पर केन्द्रित किया और इनके बढ़ते चलन पर कहा कि आयोग इन चुनौतियों से सख्ती और ठोस रणनीति के साथ निबटेगा ताकि इस कारण किसी बच्चे का जीवन संकट में ना आए।
इस मौके पर पुलिस महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) श्रीमती अनुसुइया रणसिंह ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्ट प्रतिभा के धनी बच्चों को आयोग द्वारा सम्मानित किया जाना अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। इस सप्ताह के आयोजन और आयोग द्वारा किए जा रहे पहल की जितनी सराहना की जाय वो कम है।
समापन समारोह के दौरान बिहार की अंडर 19 महिला क्रिकेट टीम में चयनित नंदिनी पंडित, कत्थक नृत्यांगना और राष्ट्रीय स्तर की एथलीट प्राची पल्लवी साहू तथा चित्रकला में दक्ष पटना स्थित ‘अपना घऱ’ के मोहन प्यारे को राज्य स्तरीय विशिष्ट पुरस्कार दिया गया। इसके साथ ही विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों द्वारा अनुशंसित शिक्षा, खेलकूद एवं कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को भी सम्मानित किया गया।
बाल अधिकार संरक्षण सप्ताह के दौरान आयोग प्रांगण में चित्रकला प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता एवं रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इनमें चित्रकला प्रतियोगिता में संस्कृति आर्या, निबंध प्रतियोगिता में अमित कुमार एवं प्रह्लाद कुमार यादव को संयुक्त रूप से तथा रंगोली प्रतियोगिता में किलकारी, पटना की टीम – इर्षिता कुमारी, आदित्य राज एवं आराध्य कुमारी – को प्रथम पुरस्कार मिला।
ध्यातव्य है कि सभी जिलों के बाल गृह, बालिका गृह, पर्यवेक्षण गृह आदि से अनुशंसित प्रतिभाशाली बच्चों की ओर से संबंधित जिलों के एडीसीपी/सीपीओ ने पुरस्कार ग्रहण किया। पुरस्कार के रूप में बच्चों को ट्रॉफी, मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र दिए गए।
इस अवसर पर आयोग के पदाधिकारीगण डॉ. रूबी सिंह, श्रीमती अलका आम्रपाली, श्रीमती पिंकी कुमारी, श्रीमती किरण बाला, श्रीमती अनिता, श्री प्रशांत एवं श्री राजेश किशन मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती अलका आम्रपाली ने किया।
सभी बच्चों की आवाज है बाल अधिकार संरक्षण आयोग – डॉ. अमरदीप
Leave a Comment


