मदनी के बयान पर सैफी का करारा प्रहार
वर्ल्ड पीस हार्मोनी के चेयरमैन मोहम्मद शकील सैफी ने कहा मौलाना अरशद मदनी का बयान भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना
नई दिल्ली।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के उस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “भारतीय मुसलमान देश की बड़ी संस्थाओं में शीर्ष पदों तक नहीं पहुंच सकते।” इस बयान को वर्ल्ड पीस हार्मोनी के चेयरमैन मोहम्मद शकील सैफी ने कड़ा, तर्कपूर्ण और स्पष्ट प्रतिवाद देते हुए भ्रामक, निराशाजनक और गैर-जिम्मेदाराना बताया है।
*“भारत का संविधान सबको समान अवसर देता है, बयान पूरी तरह तथ्यहीन”—सैफी*
सैफी ने कहा कि भारत का संविधान किसी नागरिक को उसके धर्म, जाति या भाषा के आधार पर कभी सीमित नहीं करता। उन्होंने मदनी की टिप्पणी को भारत की संवैधानिक संरचना और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार बताया।
उन्होंने कहा— “भारत में प्रतिभा और योग्यता ही सफलता का आधार है। यहां हर नागरिक—चाहे वह किसी भी धर्म का हो—देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंच सकता है और पहुंचा भी है। मदनी साहब का बयान देश की सकारात्मक सोच को कमजोर करता है।”
*सैफी ने दिए ठोस उदाहरण: “मुसलमान शीर्ष पदों पर पहुँचे और इतिहास रचा”*
सैफी ने मदनी के दावे का जवाब देते हुए कई उदाहरण रखे—
भारत के राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI)
भारतीय हॉकी टीम के कप्तान
कई केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल, वैज्ञानिक, सेना एवं प्रशासनिक अधिकारी
उन्होंने कहा—“ये उदाहरण बताते हैं कि भारत में मुसलमानों के लिए कोई सीमा नहीं है। यहां योग्यताओं के आधार पर हर पद प्राप्त किया जा सकता है। यह हमारा लोकतंत्र है।”
*“डॉ. कलाम—मुस्लिम युवाओं के लिए सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत”*
सैफी ने विशेष रूप से कहा कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महान वैज्ञानिक और राष्ट्रपति इस बात का प्रमाण हैं कि लक्ष्य केवल मेहनत, लगन और देशभक्ति से हासिल होते हैं, न कि जाति या धर्म से तय होते हैं।
उन्होंने कहा— “कलाम साहब ने दुनिया को दिखाया कि भारत हर प्रतिभा को अवसर देता है। वे मुसलमानों के ही नहीं, पूरे देश के गौरव हैं।”
*“ऐसे बयान समाज को बांटते हैं, निराशा फैलाते हैं”—सैफी का आरोप*
सैफी ने कहा कि मौलाना मदनी का बयान सामाजिक सौहार्द को कमजोर करता है और देश के मुसलमान युवाओं के मन में अनावश्यक निराशा पैदा करता है। उन्होंने कहा “भारत की आत्मा समानता और संवैधानिक अधिकारों पर आधारित है। इससे भटकाने वाले बयान देशहित में नहीं हैं।”
सैफी ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत की असली ताकत विविधता में एकता है। देश का संविधान हर नागरिक को अवसर की समानता प्रदान करता है। ऐसे समय में जब युवा आगे बढ़ने की चाहत रखते हैं, तब निराशाजनक बयान न केवल तथ्यों को तोड़ते हैं बल्कि भविष्य की ऊर्जा को भी कमजोर करते हैं।
उन्होंने अपील की कि—
“हमें निराशा नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना चाहिए।”
“मुसलमानों के लिए भारत में शीर्ष पदों के द्वार हमेशा खुले—यह इतिहास और हकीकत दोनों है”:मोहम्मद शकील सैफी
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