भाई और बहन के बीच स्नेह विश्वास और प्रेम को मजबूत करने का प्रतीक है भैया दूज
कोसी नाऊ, सिंहेश्वर (मधेपुरा)
भाई बहन का पर्व भैयादूज पर बाबा सिंहेश्वरनाथ मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस अवसर पर भैया दूज ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र मांगी। भैयादूज पर्व अवसर पर बाबा मंदिर सिंहेश्वर के प्रांगण में सुबह से ही महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए महिलाओं का तांता लगा रहा। पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं ने प्रसाद वितरित किया। इस दौरान भाई-बहन के पवित्र संबंध को मजबूत करने का संकल्प भी लिया गया। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर पूजा में भाग लिया और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं।ज्योतिष एवं पंडित विपिन कुमार झा ने पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्कंदपुराण के अनुसार, भैया दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन यमराज को प्रसन्न कर विधि-विधान से उनकी पूजा करने वालों को मनोवांछित फल प्राप्त होता है। इस पर्व पर घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और परिवार के सदस्यों को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस दिन भाई अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथों से बना भोजन ग्रहण करता है, जिससे उसकी उम्र बढ़ती है और जीवन के कष्टों का निवारण होता है।
:::दिन भर सिंहेश्वर मंदिर में बना रहा धार्मिक माहौल::
दिन भर बाबा सिंहेश्वर नाथ मंदिर में धार्मिक माहौल बना रहा। श्रद्धा और उत्साह के साथ महिलाओं ने पवित्र पर्व को मनाया। भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। बहनों ने तिलक किया बदले में भाइयों ने दिए उपहार। बहन ने अपने से भाई के लिए तरह-तरह के व्यंजन तैयार किये। वहीं, भाई को तिलक लगाकर दीर्घायु होने की कामना की। बहन ने अपने से भाई के लिए तरह-तरह के व्यंजन तैयार किये। वहीं, भाई को तिलक लगाकर दीर्घायु होने की कामना की।
::पर्व मनाने दूसरे प्रदेशो से अपने घर पहुंचे भाई बहन::
झारखंड के जमेशदपुर टाटा नगर से जीवछपुर गांव पहुंची पहुंची दो छोटी बहन ने भाई को तिलक लगाया।वहीं दिल्ली से रोशन,चंदन,कुंदन,दिलीप और टाटा नगर से गमहरिया टोला पहुंचे रिशु झा एवं पारस मणी झा ने अपनी बहन नेहा उर्फ रिंकीके साथ त्योहार मनाया। नेहा ने अपने भाईयों की दीर्घायु की कामना की।वहीं सृष्टि श्रेया और सुरभि आर्या ने अपने भाई रूद्र कश्यप व राजा बाबू को तिलक कर उनकी दीर्घायु होने की कामना की। छोटे भाई ने भी दोनों बड़ी बहन को गिफ्ट दिया।बताया कि रक्षाबंधन की तरह ही भैया दूज भाई व बहन के स्नेह का पर्व है। रूद्र कश्यप ने
गिफ्ट देकर दीदी से आशीर्वाद लिया।
::हर भाई-बहन के लिए बेहद खास होता है भैया दूज का पर्व ::
पंडित विपिन कुमार झा ने भाई दूज भाई-बहन के प्रेम का त्योहार है, जो कार्तिक मास की द्वितीया को मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई भी बहनों को उपहार देते हैं और उनकी रक्षा का वचन देते हैं। माना जाता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे, जिससे इस पर्व की शुरुआत हुई।
भाई दूज का पर्व हर भाई-बहन के लिए बेहद खास होता है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इसे भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। यह भाई और बहन के बीच स्नेह विश्वास और प्रेम को मजबूत करने का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक करके उनकी लंबी उम्र, सुख, समृद्धि और जीवन में खुशहाली की कामना करती हैं। भाई अपनी ओर से बहनों को उपहार देकर उनके प्रति अपनी स्नेह और जीवन रक्षा का वचन देते हैं।
::बहनें अपने भाइयों को आमंत्रित कर स्नेहपूर्वक कराती हैं भोजन:
रक्षाबंधन की तरह ही यह त्योहार भी भाई-बहन के स्नेह और प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं। विवाहित बहनें अपने भाइयों को घर आमंत्रित करती हैं, उन्हें सूखा नारियल भेंट करती हैं और स्नेहपूर्वक भोजन कराती हैं। ऐसा माना जाता है कि भाई दूज के दिन बहन के घर जाकर भोजन करने से भाई की आयु बढ़ती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस पावन पर्व को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।
:::भैया दूज के दिन ही अपनी बहन यमुना के घर पधारे थे यमराज::
पौराणिक कथा के अनुसार, भैया दूज के दिन ही यमराज अपनी बहन यमुना के घर पधारे थे। इसी घटना से भाई दूज या यम द्वितीया मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई। सूर्यपुत्र यम और यमुना भाई-बहन थे। यमुना ने कई बार अपने भाई को घर आने के लिए आमंत्रित किया, और एक दिन यमराज उसके घर पहुंचे। यमुना ने उनका स्नेहपूर्वक स्वागत किया, उन्हें भोजन कराया और तिलक लगाकर उनके सुखमय जीवन की कामना की। विदा लेते समय जब यमराज ने बहन यमुना को वरदान मांगने के लिए कहा, तो उसने कहा कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे घर अवश्य आएं और जो बहन इस दिन अपने भाई का तिलक करे, उसे कभी आपका भय न हो।


