पूर्व प्रत्याशी निखिल मंडल पर एक और भरोसा या नए चेहरे को उतारा जाएगा मैदान में
– मधेपुरा का किला फतेह करने के लिए जदयू इस बार नहीं लेगी कोई रिस्क
श्वेत कमल बोआ यादव की भी है मजबूत दावेदारी
जदयू पूर्व जिलाध्यक्ष बिजेंद्र नारायण यादव, प्रो सत्यजीत यादव भी टिकट के दावेदार
– पिछले तीन चुनाव में मधेपुरा से जदयू को नहीं मिली है जीत की खुशी
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विशाल भारती, कोसी नाउ, मधेपुरा:
मधेपुरा विधानसभा हॉट सीट में से एक रहा है।लगातार 3 बार से राजद का कब्जा है।चुनावी सरगर्मी के बीच लोगों की निगाहें जदयू से होने वाले प्रत्याशी पर है।अब एक हफ्ते के भीतर चुनाव की घोषणा तय मानी जा रही है।ऐसे में सत्ताधारी दल से बनाए जाने वाले प्रत्याशी को लेकर काफी चर्चा हैं। 2020 में जदयू उम्मीदवार रहे निखिल मंडल पुनः टिकट के दावेदार है।वही श्वेत कमल बौआ यादव भी मजबूत दावेदार के रूप में उभर कर सामने आए है।प्रत्याशी घोषणा से पूर्व ही आक्रामक प्रचार से हलचल है।वही इन दोनों के अलावे प्रो सत्यजीत यादव एवं बिजेंद्र नारायण यादव भी दावेदारी ठोके हुए है।लेकिन सवाल यह है कि उन योद्धाओं में शीर्ष नेतृत्व किसपर भरोसा जताती है। लगातार पिछले तीन चुनाव में, जिसमें कि एक बार जदयू-आरजेडी साथ लड़े थे उसको छोड़कर जदयू को यहां जीत मयस्सर नहीं हुई है। जिस प्रकार से लगातार तीन जीत दर्ज करने के बाद भी राजद ने वर्तमान विधायक को सीधे टिकट देने के बजाए सर्वे करा रही है। उसी प्रकार जदयू भी मधेपुरा सीट को अपने पाले में करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है।
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पूर्व प्रत्याशी के टिकट मिलने की संभावना को चुनौती दे रहे कई चेहरे
मंडल मसीहा के नाम से विख्यात एवं बिहार के पूर्व सीएम बी.पी. मंडल के पौत्र निखिल मंडल ने 2020 में जदयू के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा था। हालांकि उस चुनाव में उसे राजद के प्रत्याशी प्रो.चंद्रशेखर यादव के हाथों लगभग 16,000 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन बी.पी. मंडल के परिवार से होना पूर्व प्रत्याशी निखिल मंडल के लिए काफी सकारात्मक है एवं वे टिकट के रेस में तुलनात्मक रूप से अभी मजबूत तो दिख रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी जदयू के जिला इकाई के नेता सत्यजीत यादव एवं विजेंद्र नारायण यादव से कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। श्वेत कमल ऊर्फ बौआ यादव भी टिकट की रेस में है। लगातार चुनाव प्रचार भी चला रहे है। एनडीए के मधेपुरा विधानसभा क्षेत्र के हुए कार्यकर्ता सम्मेलन में अपना दम दिखा चुके है।
पिछले चुनाव में एलजेपी एवं पप्पू फैक्टर ने बिगाड़ा था खेल :-
2015 के विधानसभा चुनाव में तो जदयू-राजद का गठबंधन था। उस चुनाव में महागठबंधन के प्रत्याशी रहे प्रो. चंद्रशेखर यादव 90,974 वोट के साथ 49.52 प्रतिशत वोट हासिल किया था। वहीं एनडीए के उम्मीदवार विजय कुमार विमल भाजपा – 53,332 वोट के साथ 29.03 प्रतिशत वोट शेयरिंग कर दूसरे स्थान पर रहे थे। लेकिन 2020 के चुनाव में एनडीए में रहते हुए चिराग पासवान के द्वारा जदयू उम्मीदवार के सामने अपना उम्मीदवार उतारने के कारण जदयू को हार का सामना करना पड़ा था। 2020 के विधानसभा चुनाव को एक नजर में देखें तो एलजेपी प्रत्याशी साकार यादव सुरेश यादव ने लगभग छह हजार वोट प्राप्त किया था तो वहीं पप्पू यादव ने 26,591 वोट प्राप्त किया था। वहीं जदयू प्रत्याशी रहे निखिल मंडल 65,070 वोट प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रहे थे। कई राजनीतिक विश्लेषक की मानें तो पप्पू यादव के चुनाव लड़ने से राजद को नुकसान तो वहीं एलजेपी के प्रत्याशी से जदयू को नुकसान हुआ था।
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मिशन 2025 में जदयू के लिए हर सीट महत्वपूर्ण
2020 में जदयू को एलजेपी के द्वारा उसके हर प्रत्याशी के सामने अपना उम्मीदवार उतारा था। इसका खामियाजा जदयू को अपना 28 सीट गंवाकर भुगतना पड़ा था। इसी को लेकर इस बार जदयू किसी भी सीट पर ढ़ील देने के मूड में नहीं है। इसी का परिणाम है कि अब तक स्थिति कुछ भी स्पष्ट नहीं है। लगातार जदयू के जिला स्तर के नेताओं के द्वारा शक्ति प्रदर्शन एवं अपना दावा करने वालों को लेकर जदयू ने कोई संकेत स्पष्ट नहीं किया है और न ही जदयू ने इसको लेकर अपना रूख ही स्पष्ट किया। वहीं लगातार बीजेपी खेमे से भी बगावत की आवाज उठ रही है कि उस खेमे से भी मधेपुरा विधानसभा से प्रत्याशी उस दल का हो। जदयू के लिए ये भी चुनौती है कि किस प्रकार से उस खेमे को भी नाराज किए बिना अपना प्रत्याशी चुनें। वहीं दूसरी ओर लगातार सक्रियता से अपना योगदान देने वाले एवं अपना जनाधार रखने वाले नेताओं को भी दरकिनार करना बड़ी चुनौती है। यह चुनौती इस लिए भी बड़ी है कि पिछले चुनावों से सीख लेकर इस बार जदयू अपने घटक दलों को नाराज किए बिना कैसे अपना प्रत्याशी का नाम घोषित करें।
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एक नजर में पिछले तीन चुनावी परिणाम
चुनाव वर्ष – प्रत्याशी का नाम – पार्टी का नाम – कुल प्राप्त वोट – परिणाम
2010 – प्रो. चंद्रशेखर यादव – राजद – 81,116 – जीत
– रमेंद्र कमार यादव – जदयू – 60537 – हार
2015 -प्रो. चंद्रशेखर यादव – राजद – 90,974 – जीत
– विजय कुमार विमल – बीजेपी – 53,332 – हार
2020 – प्रो. चंद्रशेखर यादव – राजद – 81,116 – जीत
– निखिल मंडल – जदयू – 65,070 – हार
– पप्पू यादव – जाप – 26,591 – हार
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