विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक ऐतिहासिक और साहसिक फैसला लेते हुए घोषणा की है कि अब परीक्षा शुल्क केवल ऑनलाइन और कैशलैस माध्यम से ही जमा होगा। इस नई व्यवस्था में शुल्क सीधे विश्वविद्यालय के खाते में जाएगा और उसके बाद ही महाविद्यालयों को उनका हिस्सा प्राप्त होगा। इस कदम के साथ विश्वविद्यालय ने न केवल छात्रों के आर्थिक शोषण की राह बंद कर दी है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही का भी नया अध्याय लिखा है।
लंबे समय से निजी महाविद्यालय छात्रों से मनमाने ढंग से शुल्क वसूलते रहे हैं। कभी किसी नए नाम से चार्ज जोड़कर, तो कभी अतिरिक्त मद में पैसा वसूलकर छात्रों की जेब पर बोझ डाला गया। यह स्थिति छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए भारी चिंता और असुरक्षा का कारण बनी हुई थी। विश्वविद्यालय का यह कदम सीधे-सीधे उन सभी गलत परंपराओं पर प्रहार है जो वर्षों से छात्रों का शोषण करने के लिए चलाई जा रही थीं। अब कॉलेज प्रशासन की मनमानी और दबंगई पर ताला लग चुका है और छात्र पहली बार महसूस करेंगे कि उनकी मेहनत की कमाई का पैसा सही जगह और सही तरीके से जा रहा है।
संयुक्त छात्र संगठनों – युवा शक्ति छात्र परिषद, छात्र जदयू – ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि यह छात्रों के संघर्ष और एकजुटता की ऐतिहासिक जीत है। युवा शक्ति छात्र परिषद के छात्र नेता अजीत यादव ने कहा कि यह पहल शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और जिम्मेदार बनाने की दिशा में क्रांतिकारी बदलाव है। अब किसी भी कॉलेज को यह अधिकार नहीं होगा कि वह अपनी मनमानी से छात्रों से पैसा वसूले। शुल्क की हर प्रक्रिया पारदर्शी होगी और विश्वविद्यालय की निगरानी में ही पूरी होगी।
उन्होंने कहा कि वर्षों से छात्र विवश होकर कॉलेजों द्वारा तय मनमाना शुल्क भरने को बाध्य रहे हैं। इस निर्णय ने छात्रों को बड़ी राहत दी है और विश्वविद्यालय प्रशासन की संवेदनशीलता को साबित किया है।
छात्र युवा शक्ति के सुशील कुमार ने कहा कि इस फैसले ने कॉलेज प्रशासन की दबंगई पर सीधा ब्रेक लगा दिया है। अब तक कॉलेज जब चाहे और जैसे चाहे छात्रों से शुल्क वसूलता था, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से हर पैसे का हिसाब पारदर्शी रहेगा और छात्रों का शोषण रुक जाएगा।
संयुक्त छात्र संगठनों ने कहा कि यह फैसला केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है बल्कि छात्रों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में निर्णायक प्रहार है। अब तक जिस तरह से कॉलेजों द्वारा दबावपूर्ण शुल्क वसूली की काली परंपरा चलाई जाती रही है, वह अब खत्म होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह साबित कर दिया है कि अगर छात्र अपनी बात मजबूती से रखते हैं तो व्यवस्था बदल सकती है।
छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इस साहसिक और ऐतिहासिक कदम के लिए धन्यवाद और आभार प्रकट किया है और उम्मीद जताई है कि आगे भी इसी तरह छात्रों के हित में पारदर्शी नीतियाँ लागू की जाती रहेंगी।
संयुक्त छात्र संगठनों का संदेश स्पष्ट है – छात्रों की जेब पर डाका अब और नहीं, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और डिजिटल प्रशासन ही होगी नई पहचान।



