आज दिनोंदिन नए तकनीक आ रहे हैं। कोरोना काल के बाद से जिस प्रकार से लोगों ने डिजटलीकरण को अपनाया है।उसके बाद से पूरा गेम बदल गया है। पहले तो लोगों से राह चलते छीना झपटी होती थी। उस स्थिति में साइबर ठगी की तुलना में बचाव को लेकर काफी मौके थे। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। पिछले दो वर्षों से चैट जैपीटी सहित सौ से भी अधिक एआई आ चुके हैं। इसके बाद से अब ठगी करने वाले ऑनलाइन आकर लोगों के साथ नए तकनीक के साथ मिलकर ठगी कर रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि हम और आप भी थोड़ी सजगता बरतें। आरबीआई के नए नियमों के अनुसार से यदि आपकी गलती नहीं एवं आपने ससमय शिकायत दर्ज कराई तो बैंक आपको पूरा पैसा रिफंड करने के लिए बाध्य होगा। साइबर ठगी से बचने के लिए हमें छोटे-छोटे स्टेप्स उठाने की आवश्यकता है। जिससे हम ऐसे साइबरों ठगों से अपने डेटा एवं पैसे को बचा सके।
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सिर्फ पैसे नहीं आपकी पर्सनल जानकारी पर भी है खतरा
बदलते समय के साथ अब पैसे नहीं आपकी पर्सनल डेटा पर भी साइबर ठगों की नजर है। जो इस जालसाजी को सबसे खतरनाक बनाता है। इसको लेकर समूचे विश्व में कई बार वाट्सएप, फेसबुक, गूगल सहित अन्य सोशल मीडिया कंपनियों पर हमारे डेटा को कलेक्ट करने के आरोप लगते रहे हैं। इसी को लकर वहीं बार बड़े साइबर ठग इन बड़ी कंपनियों के डेटा सेंटर से हमारे डेटा को लेकर उसका मिसयूज करते हैं। आज वाट्सएप हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। इसको लेकर इंड-टू-इंड इनक्रिप्शन के ऑप्श्न दिखाई देता है। लेकिन कई बार यूजर्स की थोड़ी सी लापरवाही से हैकर इसमें सेंध लगा देते है और हमारा पर्सनल एवं प्राइवेट डेटा भी या तो पब्लिक हो जाता है या पब्लिक करने की धमकी देकर ठगी की जाती है।
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हर रोज बदल रहा ठगी का तरीका रहें सावधान
सबसे पहले डेटा कलेक्शन, उसके बाद होती है ठगी
आजकल बड़े मॉल से लेकर छोटे दुकानदार भी जीएसटी आने के बाद से आनलाइन बिल देने लगे हैं। लेकिन जरा ठहरिए जब भी हम जहां आनलाइन बिलिंग देकर सामान खरीदते हैं, वहां हमसे हमारा मोबाइल नंबर साझा करने को कहा जाता है। एक व्यक्ति औसतन तीन दर्जन से अधिक अलग-अलग ऐसे दुकानों पर अपना नंबर शेयर कर चुका होता है। इसके बाद बड़े-बड़े मॉल से हमारे मोबाईल नंबर एवं हमारा नंबर को कौड़ियों के भाव में बेच दिया जाता है। एक चीज अक्सर आपने नोटिस किया होगा, जब से आपने ऐसे जगहों पर नंबर देना शुरू किया है, तब से ही आपके नंबर पर कभी लोन लेने के लिए, क्रेडिट कार्ड लेने, इंश्योरेंस लेने के लिए एजेंट्स के पूरे दिन कितने ही फोन आने लगे।
एक बार हमारा डेटा हैकर्स के हाथ में चला जाता है तो फिर उसके बाद से हमारे साथ ठगी की कोशिश शुरू हो जाती है। बचाव- इससे बचने के लिए शॉपिंग करने के लिए एक नंबर अलग से रखें, जिसका उपयोग न तो आप सोशल मीडिया साइट्स पर करते हैं और न ही वह आपके बैंक से कनेक्टेड हो।
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वाट्सएप पर वीडियो काल कर ब्लैकमेलिंग
विगत कुछ महीनों वाट्सएप पर वीडियो कॉल करके स्क्रीन को ब्लैंक कर दिया जाता था और जैसे ही आप उस कॉल को रिसीव करके 10 से 20 सेकंड के लिए भी चालू रखते उसके बाद उस कॉल का स्क्रीन रिकार्ड करके सेव कर लेता है। उसके बाद उसमें एडिटिंग करके उसमें नग्न एवं अश्लील हड़कत करते हुए वीडियो को एआई के मदद से डालकर संबंधित यूजर्स से ब्लैकमेलिंग के जरिए पैसा ऐंठा जाता है। इसको लेकर यदि आपके साथ इस प्रकार की कोई ब्लैकमेलिंग की जाती है तो इससे डरने के बजाए तुरंत आनलाइन जाकर साइबर जीओवी के सरकारी वेबसाइट पर कंप्लेन रजिर्स्ड करके उस वीडियो को अपलोड कर देने के बाद 24 घंटे के अंदर आपके वीडियो को हर प्लेटफार्म से हटा दिया जाता है। साथ ही आपको मिलने वाले ब्लैकमेलिंग के धमकी देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
एआई के गठजोड़ से लोगों से हो रही साइबर ठगी, बचाव जरूरी
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